मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया
14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया है। मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने इस मामले को ‘रेरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरल से...
14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया है।
मेरठ जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने इस मामले को ‘रेरेस्ट ऑफ रेयर’ (विरल से विरलतम) मानते हुए दोनों मुख्य दोषियों मुस्कान रस्तोगी (उम्र 26) और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला (उम्र 28) को फांसी (मृत्युदंड) की सजा सुनाई है।
मृत्यु के साथ-साथ अदालत ने दोनों दोषियों पर हत्या (BNS की धारा 302) के तहत 50-50 हजार रुपये और साक्ष्य मिटाने की धारा के तहत 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
न्यायधीश ने महाभारत का संदर्भ दिया और कहा कि अपराधी को उसके कुकर्मों के अनुरूप सजा देना भी ‘धर्म’ का हिस्सा है। सजा सुनाने के बाद उन्होंने नियमानुसार अपनी पेन की निब तोड़कर उसे कूड़ेदान में फेंक दिया।
क्या था पूरा मामला?
पीड़ित: मृतक सौरभ राजपूत (उम्र 29) मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी थे और लंदन में कार्यरत थे। वह अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे।
3 मार्च 2025 को मुस्कान ने अपने पति सौरभ को खाने में नींद की दवा (नशीला पदार्थ) दे दी। इसके बाद उसने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला को घर बुलाया और दोनों ने मिलकर धारदार हथियार से सौरभ की निर्मम हत्या कर दी।
सबूत मिटाने के लिए उन्होंने सौरभ के शव को तीन टुकड़ों में काट दिया। उन्होंने बाजार से एक नीला प्लास्टिक ड्रम, सीमेंट और रेत खरीदा। शव के टुकड़ों को ड्रम में डालकर उसे सीमेंट के मिक्चर से पूरी तरह पैक कर दिया ताकि बदबू न आए।
वारदात के बाद मुस्कान अपनी बेटी को मायके छोड़कर प्रेमी साहिल के साथ शिमला और मनाली घूमने चली गई। वह सौरभ के ही फोन से उसके परिवार को मैसेज भेजकर गुमराह करती रही कि सौरभ ठीक है।
सौरभ का कोई पता न चलने पर जब पुलिस ने कड़ाई से तफ्तीश की, तो मार्च 2025 के मध्य में इस खौफनाक हत्याकांड का खुलासा हुआ। पुलिस ने घर से सीमेंट से भरा वह नीला ड्रम बरामद किया, जिसमें से सौरभ के शव के अवशेष मिले। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। दो युवा IPS अफसरों (आयुष विक्रम सिंह और अंतरिक्ष जैन) ने इस केस की बेहतरीन वैज्ञानिक और तकनीकी जांच की थी।
यह मुकदमा करीब 13 महीने तक कोर्ट में चला, जिसमें कुल 126 तारीखें (सुनवाइयां) हुईं।
अभियोजन पक्ष ने ठोस परिस्थितिजन्य और तकनीकी साक्ष्य पेश किए। अदालत में 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिनमें वह दुकानदार भी शामिल था जिससे ड्रम, सीमेंट, और छुरा खरीदा गया था।
अदालत ने 30 सितंबर 2026 को ही दोनों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार दे दिया था, और सजा मुकर्रर करने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी।
जब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट ने सजा सुनाई, तो दोनों दोषी रो पड़े। वहीं कोर्ट रूम में मौजूद सौरभ राजपूत की मां और भाई ने इस फैसले पर राहत जताई और अदालत परिसर ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
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