एयरोस्पेस लैब (ADA,अदा) बेंगलुरु की ऊंची उड़ान, अपना ही नहीं पूरे देश के लिए करेगा काम
स्वर्गीय डॉक्टर श्री देवराम देवांगन का पौत्र और साधारण परिवार के दीपेंद्र देवांगन कि एयरोस्पेस लैब (ADA,अदा) बेंगलुरु की ऊंची उड़ान,परिजनों ने कहा बच्चा अपना ही नहीं पूरे देश के लिए करेगा काम,कठिन...
स्वर्गीय डॉक्टर श्री देवराम देवांगन का पौत्र और साधारण परिवार के दीपेंद्र देवांगन कि एयरोस्पेस लैब (ADA,अदा) बेंगलुरु की ऊंची उड़ान,परिजनों ने कहा बच्चा अपना ही नहीं पूरे देश के लिए करेगा काम,कठिन संघर्ष और गंभीर परिश्रम से अपनों का आशीर्वाद हो रहा साकार
चांपा- पिता हरि देवांगन व्यवसाय से एक बिजली मैकेनिक व जय जोहार सीजी न्यूज़ संवाददाता जो स्थानीयता का प्रतिनिधित्व करते हैं,और मां पुष्पा देवांगन साधारण ग्रहणी होते हुए भी बच्चों की पढ़ाई पर कभी कोई समझौता नहीं किया,जहां एक तरफ कुछ साल पहले दीपेंद्र स्वयं पिता की दुकान पर बैठकर काम करता था तो दूसरी तरफ पढ़ाई की गंभीरता को कभी भी नजर अंदाज न करने की खासियत ने आज सफलता की उड़ान को लेकर गया है जहां पहुंचाना कभी आसान नहीं समझा जा सकता,एक साधारण आर्थिक परिवेश से गंभीर परेशानियों का सामना करते हुए पूरा परिवार ने एक जूता के साथ जो संघर्ष किया है उसकी मिसाल बहुत देखने सुनने में काम ही आता है।
सफलता को छोटी या बड़ी नहीं आंका जा सकता, व्यक्ति विशेष के लिए उसकी सफलता छोटी या बड़ी के रूप में नहीं निर्धारित की जानी चाहिए सफलता प्राप्त करने का मायने हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकता है, ठीक इसी तरह दीपेंद्र ने अपनी मंजिल देश सेवा की तरफ बचपन से ही रखकर सही दिशा में कदम रखते हुए कठिन संघर्ष के साथ आगे बढ़ा वह एक प्रेरणादायक सूत्र हो सकता है,उल्लेखनीय है कि 12वीं पास करने के बाद अपने मनपसंद क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए पारुल यूनिवर्सिटी से बीटेक में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग करने के बाद अपनी पढ़ाई को यहीं पर नहीं रोका परिजनों ने आगे बढ़ने के लिए हर आर्थिक परेशानियों को पछाड़ते हुए आगे बढ़ाने की राह को अपनाया,परिवार में लगातार आर्थिक समस्या चलते रहने के बाद भी दीपेंद्र को गेट कोचिंग के लिए आगे बढ़ने का मन हुआ लेकिन दिक्कत के चलते कोचिंग को भी बीच में छोड़ना पड़ा,लेकिन हौसला नहीं टूटा कोरोना संक्रमण के बाद भी परिवार ने संघर्ष करते हुए बच्चे का साथ दिया और घर में मां के मनोबल सहारा लेकर आगे बढ़ दिन-रात मेहनत की और अंततः प्रथम प्रयास में उसने गेट ऐरो स्पेस इंजीनियरिंग के लिए ऑल इंडिया रैंक 207 लाकर जो साबित किया वह किसी मिसाल से काम नहीं है,कुछ ही दिनों बाद काउंसलिंग में देश के प्रतिष्ठित एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के लिए प्रसिद्ध कानपुर आईआईटी में एयरोस्पेस ब्रांच में Mtech करने का जबरदस्त अवसर मिला,इसी से आगे बढ़ते हुए शानदार अंकों के साथ एयरोनॉटिकल क्षेत्र में एम टेक कंप्लीट करने के बाद सौभाग्य से देश के प्रतिष्ठित एयरोनॉटिकल लैब में प्रोजेक्ट अस्सिटेंट के लिए चयन होना बड़ा गौरव का विषय बन चुका है।