भीमा तालाब बचाने सड़कों पर उतरा जनसैलाब, नगर पालिका को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
भीमा तालाब बचाने सड़कों पर उतरा जनसैलाब, नगर पालिका को एक सप्ताह का अल्टीमेटम जांजगीर। शहर की ऐतिहासिक धरोहर भीमा तालाब के संरक्षण की मांग को लेकर जांजगीर में महाआंदोलन किया गया। विधायक ब्यास कश्यप...
भीमा तालाब बचाने सड़कों पर उतरा जनसैलाब, नगर पालिका को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
जांजगीर। शहर की ऐतिहासिक धरोहर भीमा तालाब के संरक्षण की मांग को लेकर जांजगीर में महाआंदोलन किया गया। विधायक ब्यास कश्यप की अपील पर बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और तालाब की बदहाली, गंदगी तथा संरक्षण में कथित लापरवाही के खिलाफ आवाज बुलंद की। आंदोलन में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोगों ने ऐतिहासिक जलस्रोत को बचाने के लिए एकजुटता दिखाई।
तालाब की सफाई और पुनर्जीवन की मांग
आंदोलनकारियों ने कहा कि भीमा तालाब जांजगीर की ऐतिहासिक पहचान और जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसकी उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लोगों ने तालाब की नियमित साफ-सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की। उनका कहना था कि ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखना प्रशासन और समाज, दोनों की जिम्मेदारी है।
नगर पालिका को एक सप्ताह का अल्टीमेटम
प्रदर्शन के दौरान नगर पालिका प्रशासन को तालाब की स्थिति में सुधार के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया गया। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नगर पालिका का घेराव किया जाएगा। इसके साथ ही तालाब के संरक्षण के लिए आगे भी आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए गए।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजरें
महाआंदोलन के जरिए लोगों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भीमा तालाब के संरक्षण का मुद्दा अब शहर के प्रमुख जनहित के मुद्दों में शामिल हो गया है। आंदोलनकारियों ने ऐतिहासिक जलस्रोत को बचाने और उसकी पुरानी पहचान बनाए रखने का संकल्प लिया।
अब नगर पालिका प्रशासन की अगली कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं। एक सप्ताह के अल्टीमेटम के बाद तालाब की सफाई, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि मांगों पर ठोस पहल नहीं होने की स्थिति में विरोध को और तेज किया जा सकता है।