बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह, साइबर ठगी से बचने पुलिस ने चलाया जागृति अभियान,
जांजगीर-चांपा | बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और आम लोगों को डिजिटल ठगी के नए तरीकों से सतर्क करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के...
जांजगीर-चांपा |
बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम और आम लोगों को डिजिटल ठगी के नए तरीकों से सतर्क करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत पुलिस लोगों को साइबर अपराध के संभावित तरीकों और उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दे रही है। संबंध में पुलिस अधीक्षक विजय पाण्डेय ने विस्तार से मीडिया के माध्यम से लोगों को जानकारी दी।
पुलिस ने लोगों को स्पष्ट रूप से आगाह किया है कि ओटीपी, एटीएम/डेबिट कार्ड का पिन, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड, यूपीआई पिन, सीवीवी और बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। बैंक या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर फोन करने वालों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है।
पुलिस के अनुसार साइबर ठग फर्जी लिंक, क्यूआर कोड, स्क्रीन शेयरिंग, फर्जी केवाईसी अपडेट, इनाम-लॉटरी, नौकरी का झांसा और अनजान व्हाट्सएप वीडियो कॉल जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। अनजान लिंक पर क्लिक करने या संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने से मोबाइल और बैंकिंग जानकारी खतरे में पड़ सकती है।
पुलिस ने कहा कि यूपीआई से पैसे प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन डालने की जरूरत नहीं होती। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस एप भी इंस्टॉल न करें।
किसी साइबर ठगी की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।
पुलिस का संदेश है—सतर्क रहें, डिजिटल लेन-देन में सावधानी बरतें और साइबर ठगी का शिकार होने से बचें।